ब्याज दो तरह का होता है
जब आप पैसा जमा करते हैं या उधार लेते हैं, तो ब्याज दो तरीकों से लग सकता है — simple या compound। फ़र्क समझना ज़रूरी है, क्योंकि लंबी अवधि में दोनों का नतीजा काफ़ी अलग होता है।
Simple Interest
Simple interest हमेशा सिर्फ़ मूलधन (principal) पर लगता है।
ब्याज = P × r × t
कुल = P + ब्याज
उदाहरण: ₹1,00,000 पर 8% सालाना, 3 साल
- ब्याज = 1,00,000 × 0.08 × 3 = ₹24,000
- कुल = ₹1,24,000
हर साल ब्याज एक जैसा (₹8,000) रहता है।
Compound Interest
Compound interest में हर period का ब्याज मूलधन में जुड़ जाता है, और अगली बार ब्याज पर भी ब्याज लगता है।
कुल = P × (1 + r/n)^(n×t)
n = साल में कितनी बार ब्याज जुड़ता है।
उदाहरण: ₹1,00,000 पर 8%, 3 साल, सालाना compounding
- कुल ≈ ₹1,25,971
- ब्याज ≈ ₹25,971
यानी simple के मुकाबले लगभग ₹1,971 ज़्यादा — सिर्फ़ 3 साल में।