निवेश/म्यूचुअल फंड

SIP Calculator

मासिक SIP राशि और अवधि से अनुमानित maturity value निकालें।

यह सिर्फ़ अनुमान है। म्यूचुअल फंड बाज़ार जोखिम के अधीन हैं।

SIP maturity कैसे निकलती है? (फॉर्मूला)

SIP (Systematic Investment Plan) में हर महीने एक तय राशि निवेश होती है और हर किश्त अपने बचे हुए महीनों तक compound होती है। यह टूल standard future value फॉर्मूला इस्तेमाल करता है: FV = P × [((1+i)^n − 1) ÷ i] × (1+i)। यहाँ P मासिक निवेश है, i मासिक रिटर्न दर (सालाना रिटर्न ÷ 12 ÷ 100) है, और n कुल महीनों की संख्या (साल × 12) है। आखिर में (1+i) इसलिए गुना होता है क्योंकि हम मान रहे हैं कि किश्त महीने की शुरुआत में जमा होती है। एक बात याद रखें: यह फॉर्मूला हर महीने एक तय (constant) दर मानता है, जबकि असल बाज़ार हर साल ऊपर-नीचे होता है, इसलिए नतीजा एक अनुमान है, तय आँकड़ा नहीं।

एक असल उदाहरण: ₹5,000 महीना, 12%, 10 साल

मान लीजिए आप हर महीने ₹5,000, 12% अनुमानित सालाना रिटर्न पर, 10 साल के लिए लगाते हैं। यहाँ i = 12 ÷ 12 ÷ 100 = 0.01 और n = 120 महीने होते हैं। फॉर्मूला में डालने पर maturity value करीब ₹11,61,695 आती है। इसमें आपका कुल निवेश सिर्फ़ ₹6,00,000 (5,000 × 120) है, यानी अनुमानित रिटर्न करीब ₹5,61,695 है। ध्यान दें कि जितना आपने खुद जमा किया, लगभग उतनी ही रकम growth से जुड़ गई — यही compounding का असली असर है, और यह अवधि बढ़ने पर और तेज़ होता है।

समय का असर: 10 साल बनाम 20 साल

वही ₹5,000 महीना और वही 12% रिटर्न अगर 20 साल चले तो n = 240 हो जाता है और maturity value करीब ₹49,95,740 तक पहुँच जाती है। यानी अवधि दोगुनी करने पर आपका कुल निवेश तो बस दोगुना (₹6 लाख से ₹12 लाख) हुआ, पर maturity 4 गुना से ज़्यादा (₹11.6 लाख से लगभग ₹50 लाख) बढ़ गई। वजह यह है कि शुरुआती किश्तों को compound होने के लिए ज़्यादा साल मिलते हैं। इसीलिए SIP में जल्दी शुरू करना, अक्सर बाद में राशि बढ़ाने से भी ज़्यादा असरदार साबित होता है।

कहां और कैसे इस्तेमाल करें

  • लक्ष्य-आधारित प्लानिंग: रिटायरमेंट, बच्चे की पढ़ाई या घर की down payment जैसे target के लिए अलग-अलग मासिक राशि और अवधि डालकर देखें कि लक्ष्य तक पहुँचने में क्या लगेगा।
  • तुलना: ₹5,000 बनाम ₹8,000 महीना, या 10 बनाम 15 साल डालकर देखें कि छोटा-सा बदलाव लंबे समय में कितना बड़ा फर्क बनाता है।
  • रूढ़िवादी बनाम आशावादी अनुमान: एक ही योजना पर 8%, 10% और 12% तीनों डालकर देखें कि रिटर्न कम रहने पर आपका plan कितना टिकता है।
  • step-up का मोटा अंदाज़ा: हर साल SIP बढ़ाने की सोच रहे हों तो बढ़ी हुई राशि अलग से डालकर एक rough तुलना कर सकते हैं (यह टूल एक तय राशि मानता है)।

आम गलतियां और गलतफहमियां

  • सालाना रिटर्न की जगह मासिक दर डाल देना — 12% सालाना डालें, 1% नहीं।
  • अनुमानित रिटर्न को गारंटी समझना — 12% सिर्फ़ एक assumption है; असल में कुछ साल -10% और कुछ में +20% हो सकते हैं।
  • expense ratio, exit load और capital gains tax भूल जाना — हाथ में आने वाली असल रकम इस अनुमान से कुछ कम रहती है।
  • महंगाई (inflation) नज़रअंदाज़ करना — 20 साल बाद के ₹50 लाख की खरीद-क्षमता आज के ₹50 लाख जितनी नहीं होगी।
  • lumpsum और SIP को एक मान लेना — यह टूल हर महीने बराबर किश्त (SIP) के लिए है, एकमुश्त निवेश के लिए नहीं।

ध्यान दें (सीमाएं)

  • यह सिर्फ़ अनुमान है; रिटर्न की कोई गारंटी नहीं। म्यूचुअल फंड बाज़ार जोखिम के अधीन हैं।
  • टूल एक तय सालाना दर मानता है, जबकि असल NAV रोज़ बदलता है — इसलिए असल maturity इससे ऊपर या नीचे हो सकती है।
  • टैक्स (जैसे equity पर long-term/short-term capital gains) और फंड का expense ratio इसमें शामिल नहीं; ये असल रिटर्न घटाते हैं। मौजूदा टैक्स नियम खुद या सलाहकार से जाँच लें।
  • यह निवेश सलाह नहीं है; बड़ा फैसला लेने से पहले फंड का track record, जोखिम और अपनी ज़रूरत ज़रूर देखें।
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डाले गए आंकड़े सिर्फ़ ब्राउज़र में कैलकुलेट होते हैं, सर्वर पर नहीं भेजे जाते।

प्राइवेसी पॉलिसी पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यह रिटर्न पक्का है?

नहीं। यह सिर्फ़ अनुमान है जो आपके डाले गए रिटर्न पर आधारित है। असल बाज़ार में रिटर्न हर साल बदलता है और कुछ साल घाटा भी हो सकता है। लंबी अवधि में औसत निकल सकता है, पर गारंटी किसी की नहीं।

कौन-सा रिटर्न (%) डालूं?

यह आपका अपेक्षित सालाना रिटर्न है। इक्विटी फंड के लिए लोग अक्सर 10–12% मानते हैं, debt फंड के लिए इससे कम। रूढ़िवादी अनुमान (जैसे 10%) रखना बेहतर है ताकि योजना असल में कमज़ोर न पड़े। एक ही समय में 8%, 10% और 12% तीनों देख लेना समझदारी है।

कुल निवेश और अनुमानित रिटर्न में क्या फर्क है?

कुल निवेश वह है जो आपने महीने-दर-महीने जमा किया (मासिक राशि × महीने)। अनुमानित रिटर्न उस पर compounding से जुड़ी बढ़त है। दोनों जोड़कर maturity value बनती है। ऊपर के उदाहरण में ₹6 लाख निवेश पर करीब ₹5.6 लाख रिटर्न जुड़कर ₹11.6 लाख बना।

SIP और lumpsum में कौन बेहतर है?

SIP में हर महीने थोड़ा-थोड़ा जमा होता है, जिससे rupee cost averaging मिलता है — बाज़ार गिरने पर ज़्यादा यूनिट, चढ़ने पर कम। Lumpsum में एक साथ बड़ी रकम लगती है और timing का जोखिम ज़्यादा रहता है। नियमित आय वालों के लिए आमतौर पर SIP सुविधाजनक होती है; यह टूल SIP के लिए ही बना है।

क्या यह calculator step-up SIP या महंगाई गिनता है?

नहीं। यह एक तय मासिक राशि और तय दर मानता है। हर साल राशि बढ़ाने (step-up) या महंगाई घटाने का हिसाब इसमें नहीं है। मोटे अंदाज़े के लिए बढ़ी हुई राशि अलग से डालकर देख सकते हैं, पर सटीक step-up प्लान के लिए अलग गणना चाहिए।

क्या असल maturity इस अनुमान जितनी ही होगी?

आमतौर पर थोड़ी अलग रहती है। असल में NAV रोज़ बदलता है, फंड का expense ratio और exit load कटता है, और मुनाफे पर capital gains tax लगता है। इसलिए हाथ में आने वाली रकम इस अनुमान से कुछ कम रह सकती है। सटीक हिसाब के लिए XIRR या फंड statement देखें।