फ़ाइनेंस/गणित

Interest Calculator (ब्याज कैलकुलेटर)

मूलधन, दर और अवधि से simple और compound दोनों तरह का ब्याज और कुल राशि निकालें।

ब्याज का प्रकार

Simple: P×r×t. Compound: P×(1+r/n)^(n×t). अनुमान के लिए।

Simple और Compound में फ़र्क

Simple interest सिर्फ़ मूलधन (P) पर लगता है और हर साल एक जैसा रहता है: ब्याज = P × r × t। यहाँ r दशमलव में सालाना दर है (8% यानी 0.08) और t साल में अवधि। Compound interest में हर period का ब्याज मूलधन में जुड़ जाता है और अगली बार उस बढ़ी हुई राशि पर ब्याज लगता है — यानी 'ब्याज पर ब्याज'। इसका फ़ॉर्मूला है कुल राशि = P × (1 + r/n)^(n×t), जहाँ n बताता है कि साल में कितनी बार ब्याज जुड़ता है (सालाना n=1, छमाही n=2, तिमाही n=4, मासिक n=12)। सिर्फ़ ब्याज चाहिए तो इस कुल में से P घटा दें।

एक पूरा उदाहरण — ₹1,00,000, 8%, 3 साल

मान लीजिए P = ₹1,00,000, दर 8% सालाना और अवधि 3 साल। Simple interest = 1,00,000 × 0.08 × 3 = ₹24,000, तो कुल ₹1,24,000। अब यही रकम अलग-अलग compounding frequency पर compound करने पर नतीजा ऐसे बदलता है:

  • सालाना (n=1): 1,00,000 × (1.08)³ = कुल ₹1,25,971, ब्याज ₹25,971।
  • छमाही (n=2): (1.04)⁶ लगाने पर कुल ₹1,26,532, ब्याज ₹26,532।
  • तिमाही (n=4): (1.02)¹² लगाने पर कुल ₹1,26,824, ब्याज ₹26,824।
  • मासिक (n=12): कुल लगभग ₹1,27,024, ब्याज ₹27,024।
  • यानी सिर्फ़ compounding frequency बदलने से ब्याज ₹25,971 से ₹27,024 तक चला जाता है — दर और अवधि बिल्कुल वही रखते हुए।

Compounding frequency और असली दर (EAR)

बैंक अक्सर 'सालाना दर' बताते हैं, पर असली फ़ायदा compounding की frequency पर भी निर्भर करता है। Effective Annual Rate (EAR) वह असली सालाना दर है जो frequency को हिसाब में लेती है: EAR = (1 + r/n)^n − 1। जैसे 8% अगर तिमाही compound हो तो EAR = (1.02)⁴ − 1 = 8.24%, यानी असल में 8% नहीं बल्कि 8.24% मिल रहा है। दो FD या स्कीम की सही तुलना करने के लिए सिर्फ़ 'दर' नहीं, बल्कि EAR देखें — एक ही nominal दर पर ज़्यादा frequency वाली स्कीम थोड़ा ज़्यादा देती है।

कहां और कैसे इस्तेमाल करें

  • FD/RD अनुमान: बैंक की दर और compounding (ज़्यादातर भारतीय FD तिमाही होती हैं) डालकर maturity राशि का मोटा अंदाज़ा लगाएं।
  • उधार/लोन का असली बोझ: informal उधार में अक्सर '2% महीना' जैसी दर होती है — इसे सालाना में बदलकर देखें कि सचमुच कितना महँगा है।
  • Simple बनाम compound तुलना: एक ही रकम पर दोनों निकालकर देखें कि लंबी अवधि में अंतर कितना बड़ा हो जाता है।
  • लक्ष्य योजना: Rule of 72 से पता करें कि किसी दर पर पैसा दोगुना होने में कितने साल लगेंगे।

आम गलतियां और ग़लतफ़हमियां

  • दर को दशमलव में न बदलना: फ़ॉर्मूले में 8% का मतलब 0.08 है, 8 नहीं।
  • मासिक और सालाना दर मिला देना: '2% महीना' यानी लगभग 24% सालाना (compound पर तो ~26.8%), न कि 2% सालाना।
  • Compounding frequency भूल जाना: सालाना और मासिक compounding का नतीजा अलग होता है, इसलिए n सही डालें।
  • पूरा ब्याज हाथ में आ जाना मान लेना: FD पर TDS कट सकता है, तो हाथ में आई राशि कैलकुलेटर से कम हो सकती है।
  • Inflation न सोचना: 7% ब्याज पर भी अगर महँगाई 6% है, तो असली (real) फ़ायदा सिर्फ़ करीब 1% है।

सीमाएं और सावधानियां

यह कैलकुलेटर एक गणितीय अनुमान देता है, असली bank statement नहीं। असल राशि बैंक के exact compounding तरीके, दिन-गिनती (day-count), बीच में जमा/निकासी, TDS और स्कीम के नियमों पर निर्भर करती है। RD, floating-rate loan या EMI जैसी चीज़ों में हर किश्त की timing मायने रखती है, इसलिए वहां नतीजा थोड़ा अलग आ सकता है। बड़े फ़ैसले से पहले बैंक या स्कीम की आधिकारिक शर्तें ज़रूर जांचें — यह टूल तुलना और शुरुआती योजना के लिए है, निवेश या टैक्स सलाह के लिए नहीं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Simple और compound में कौन ज़्यादा देता है?

एक ही दर और अवधि पर compound interest हमेशा simple से ज़्यादा या बराबर होता है, क्योंकि इसमें ब्याज पर भी ब्याज लगता है। अंतर पहले साल छोटा दिखता है पर अवधि बढ़ने के साथ तेज़ी से बढ़ता है। जैसे ₹1,00,000 पर 8%, 3 साल में अंतर सिर्फ़ करीब ₹1,971 है, पर 10 साल में compound ब्याज ₹1,15,893 बनाम simple ₹80,000 हो जाता है — यानी करीब ₹35,900 का फ़र्क।

Compounding frequency क्या है और क्यों मायने रखती है?

यह बताता है कि साल में कितनी बार ब्याज मूलधन में जुड़ता है — सालाना (1), छमाही (2), तिमाही (4) या मासिक (12)। जितनी बार ज़्यादा जुड़ेगा, ब्याज पर ब्याज उतना जल्दी लगेगा और कुल नतीजा थोड़ा बड़ा होगा। ज़्यादातर भारतीय FD तिमाही compound होती हैं, इसलिए तुलना करते समय यही n चुनें।

Rule of 72 क्या है — मेरा पैसा कब दोगुना होगा?

Rule of 72 एक तेज़ अनुमान है: दोगुना होने के साल ≈ 72 ÷ सालाना दर। जैसे 8% पर करीब 72/8 = 9 साल लगते हैं, और वाकई ₹1,00,000 पर (1.08)⁹ ≈ 2 गुना यानी लगभग ₹2,00,000 बन जाता है। यह सिर्फ़ compound interest के लिए और मोटे अंदाज़े के तौर पर काम करता है।

'2% महीना' ब्याज साल में कितना बन जाता है?

सिर्फ़ जोड़ने (simple) पर 2% × 12 = 24% सालाना, और अगर हर महीने compound हो तो (1.02)¹² − 1 = लगभग 26.8% सालाना। इसीलिए '2% महीना' सुनने में छोटा लगता है पर असल में बहुत महँगा उधार है। किसी भी मासिक दर को कम से कम 12 से गुणा करके सालाना बोझ ज़रूर देखें।

Effective Annual Rate (EAR) क्या है?

EAR वह असली सालाना दर है जो compounding frequency को शामिल करती है: (1 + r/n)^n − 1। जैसे 8% तिमाही compound पर EAR 8.24% बनता है, यानी बताई गई दर से थोड़ा ज़्यादा। दो स्कीम की सही तुलना nominal दर से नहीं, EAR से करें।

क्या कैलकुलेटर की राशि ही बैंक से मिलेगी?

यह एक अनुमान है, अंतिम राशि नहीं। असली रकम बैंक के compounding तरीके, day-count और खासकर TDS पर निर्भर करती है — अगर सालाना FD ब्याज तय सीमा से ज़्यादा है तो बैंक TDS काट लेता है, जिससे हाथ में कम आता है। सटीक आंकड़े के लिए बैंक की maturity slip देखें।