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Discount Calculator (छूट कैलकुलेटर)

कीमत और छूट डालें और फ़ाइनल कीमत तथा असली बचत निकालें। दूसरी छूट भी जोड़ सकते हैं।

फ़ाइनल = कीमत × (1−d1) × (1−d2). दो छूट सीधे जुड़ती नहीं।

छूट का बेसिक फ़ॉर्मूला

किसी भी छूट में दो चीज़ें निकलती हैं — कितनी बचत हुई और आख़िर में कितना देना है। बचत = कीमत × छूट% ÷ 100, और फ़ाइनल कीमत = कीमत − बचत। इसे एक ही लाइन में लिखें तो फ़ाइनल = कीमत × (1 − छूट% ÷ 100)। यानी 20% छूट का मतलब है कि आप मूल कीमत का 80% हिस्सा दे रहे हैं। जब दो छूट एक साथ लगती हैं तो पहली छूट मूल कीमत पर, और दूसरी छूट पहली के बाद बची कीमत पर लगती है: फ़ाइनल = कीमत × (1 − d1) × (1 − d2)। यही वजह है कि दो छूट का असर जोड़ से हमेशा थोड़ा कम रहता है।

एक स्टेप-बाय-स्टेप उदाहरण

मान लीजिए एक जैकेट की कीमत ₹2,000 है और ऑफ़र है '40% off + card पर extra 10%'। पहला स्टेप: 40% छूट लगाएँ, 2000 × 0.6 = ₹1,200। दूसरा स्टेप: अब बची ₹1,200 पर 10% छूट, 1200 × 0.9 = ₹1,080। तो आख़िरी कीमत ₹1,080, कुल बचत 2000 − 1080 = ₹920। अब effective छूट देखें: 920 ÷ 2000 = 0.46, यानी 46%। ध्यान दें कि 40 और 10 जोड़ने पर 50% लगता है, पर असल में सिर्फ़ 46% ही मिला। यह 4% का फ़र्क ही असली और दिखावटी छूट के बीच की खाई है।

दो छूट सीधे नहीं जुड़तीं

'20% + अतिरिक्त 10%' का मतलब 30% छूट नहीं होता। दूसरी छूट मूल कीमत पर नहीं, बल्कि पहली के बाद घटी हुई कीमत पर लगती है, इसलिए effective छूट सिर्फ़ 28% बनती है। यही सोच का सबसे बड़ा जाल तब बनता है जब कोई सोचे कि '50% + 50% = मुफ़्त'। असल में 1 − 0.5 × 0.5 = 0.75, यानी 75% off — ₹1,000 का सामान ₹250 का पड़ेगा, ₹0 का नहीं। कैलकुलेटर का काम यही साफ़ करना है: दो छूट डालते ही यह सही effective % और असली बचत दिखा देता है, ताकि 'दो बड़े नंबर' देखकर ज़्यादा उम्मीद न बंधे।

कब और कैसे काम आता है

  • दो ऑफ़र की तुलना: एक दुकान 'flat 45% off' दे रही है, दूसरी '40% + extra 10%'। ₹2,000 पर पहला विकल्प 2000 × 0.55 = ₹1,100 देता है, दूसरा ₹1,080। यानी stack वाला ऑफ़र यहाँ थोड़ा सस्ता पड़ता है — नंबर देखकर नहीं, हिसाब से पता चलता है।
  • Coupon पहले से घटी कीमत पर: sale price पर अगर extra coupon लगता है, तो दोनों फ़ील्ड भरकर देख लें कि असली effective छूट कितनी बनी, ताकि coupon का सही फ़ायदा दिख जाए।
  • बजट प्लानिंग: पहले से तय है कि जेब में इतना ही है — कीमत और छूट डालकर देख लें कि फ़ाइनल कीमत आपकी सीमा में आती है या नहीं, दुकान में calculate करने की झंझट के बिना।

आम गलतियाँ और गलतफ़हमी

  • दो छूट के प्रतिशत को जोड़ लेना (20% + 10% को 30% मान लेना) — असल में 28% ही होता है।
  • छूट के बाद की कीमत पर फिर से मूल प्रतिशत लगाकर बचत गिनना, जबकि दूसरी छूट सिर्फ़ बची राशि पर लगती है।
  • 'up to 70% off' को हर सामान पर 70% मान लेना — यह अधिकतम सीमा है, ज़्यादातर सामान पर छूट कम होती है।
  • cashback को तुरंत की छूट समझ लेना — cashback बिल घटाता नहीं, बाद में credit के रूप में आता है और अक्सर शर्तों के साथ।
  • round-off भूल जाना — दुकानें पैसे को नज़दीकी रुपये तक round करती हैं, इसलिए बिल में एक-दो रुपये का फ़र्क सामान्य है।

छूट, GST और cashback — किस पर क्या

भारत में ज़्यादातर retail सामान की MRP में GST पहले से शामिल होता है, और छूट सीधे MRP पर लगती है — तो अलग से टैक्स जोड़ने की ज़रूरत नहीं। पर कुछ invoice (जैसे कई electronics या B2B बिल) में base कीमत और GST अलग-अलग दिखते हैं; वहाँ यह मायने रखता है कि छूट टैक्स से पहले लगी या बाद में, क्योंकि टैक्स-से-पहले की छूट टैक्स की रकम भी घटा देती है। यह कैलकुलेटर सिर्फ़ छूट की गणना करता है, टैक्स नहीं जोड़ता — इसलिए टैक्स-आधारित बिल में क्रम खुद ध्यान रखें। cashback को छूट में न गिनें: ₹1,000 पर 10% instant discount में आप अभी ₹900 देते हैं, जबकि 10% cashback में अभी पूरे ₹1,000 देकर बाद में ₹100 credit पाते हैं — बचत का असर एक जैसा दिख सकता है पर पैसा और उसकी उपयोगिता का समय अलग है।

सीमाएँ और ध्यान देने की बातें

यह टूल एक बार में अधिकतम दो छूट संभालता है — अगर तीन या ज़्यादा छूट (जैसे 20% + 10% + 5%) लग रही हैं तो एक-एक करके परिणाम को दोबारा input करें, क्योंकि तीनों का असर 1 − 0.8 × 0.9 × 0.95 = 31.6% बनता है, सीधे जोड़ से नहीं। यह टूल शिपिंग फ़ीस, न्यूनतम खरीद शर्त, या 'सिर्फ़ चुनिंदा सामान पर' जैसी शर्तें नहीं जानता — असली बिल इन शर्तों से बदल सकता है। सारा हिसाब आपके ब्राउज़र में ही होता है, कोई डेटा सर्वर पर नहीं जाता। बड़ी खरीद से पहले फ़ाइनल कीमत की पुष्टि दुकान के बिल से ज़रूर कर लें।

क्या मेरा डेटा सुरक्षित है?

आपके डाले गए आंकड़े सिर्फ़ ब्राउज़र में कैलकुलेट होते हैं, सर्वर पर नहीं भेजे जाते।

प्राइवेसी पॉलिसी पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दो छूट क्यों 30% के बराबर नहीं होतीं?

क्योंकि दूसरी छूट मूल कीमत पर नहीं, बल्कि पहली छूट के बाद बची कीमत पर लगती है। 20% फिर 10% लगाने पर फ़ाइनल = कीमत × 0.8 × 0.9 = कीमत × 0.72, यानी कुल 28% छूट, 30% नहीं। जितनी बड़ी दोनों छूट होंगी, यह अंतर उतना ही बढ़ता जाएगा।

effective छूट % क्या है?

यह वह असली छूट है जो सारी लगी हुई छूटों को मिलाकर मूल कीमत पर बनती है, यानी (कुल बचत ÷ मूल कीमत) × 100। दो अलग-अलग ऑफ़र की सही तुलना इसी नंबर से होती है, क्योंकि यह अंतिम रूप से बताता है कि आपने कुल मिलाकर कितने प्रतिशत बचाया।

छूट के बाद की कीमत से मूल कीमत कैसे निकालें?

फ़ॉर्मूला है: मूल कीमत = फ़ाइनल कीमत ÷ (1 − छूट% ÷ 100)। जैसे अगर 25% छूट के बाद आपने ₹1,500 दिए, तो मूल कीमत = 1500 ÷ 0.75 = ₹2,000। इससे यह जाँचा जा सकता है कि दुकान ने बताई गई छूट सही लगाई है या नहीं।

50% + 50% छूट का मतलब सामान मुफ़्त होता है क्या?

नहीं। दूसरी 50% छूट पहली के बाद बची आधी कीमत पर लगती है, इसलिए फ़ाइनल = कीमत × 0.5 × 0.5 = कीमत × 0.25, यानी कुल 75% off। ₹1,000 का सामान ₹250 का पड़ेगा, ₹0 का नहीं।

cashback और discount में क्या फ़र्क है?

discount बिल को अभी घटाता है — 10% छूट पर ₹1,000 का सामान ₹900 में मिल जाता है। cashback में आप अभी पूरे ₹1,000 देते हैं और ₹100 बाद में wallet या statement credit के रूप में मिलता है, अक्सर न्यूनतम खरीद या समय-सीमा जैसी शर्तों के साथ। इसलिए cashback को छूट के बराबर मानकर तुरंत की बचत न गिनें।

क्या इसमें GST/टैक्स शामिल है?

नहीं। यह सिर्फ़ छूट की गणना करता है। भारत में MRP में GST आमतौर पर पहले से शामिल होता है और छूट सीधे MRP पर लगती है, पर जहाँ base कीमत और टैक्स अलग दिखें वहाँ टैक्स खुद जोड़ें या घटाएं और छूट का क्रम ध्यान रखें।