सुरक्षा/टूल

Password Generator

लंबाई और अक्षर-प्रकार चुनकर ब्राउज़र में मज़बूत रैंडम पासवर्ड बनाएं।

कम से कम एक अक्षर-प्रकार चुनें

यह टूल असल में क्या करता है?

यह टूल आपके ब्राउज़र में crypto-सुरक्षित रैंडम पासवर्ड बनाता है। आप लंबाई (4–64 अक्षर) और चार अक्षर-प्रकार — अपरकेस (A–Z), लोअरकेस (a–z), नंबर (0–9), और चिह्न (!@#$ आदि) — में से जो चाहें चुनते हैं। टूल यह सुनिश्चित करता है कि हर चुने गए प्रकार का कम से कम एक अक्षर पासवर्ड में शामिल हो, ताकि 'सिर्फ़ छोटे अक्षरों वाला' कमज़ोर पासवर्ड गलती से न बन जाए। बाकी अक्षर पूरी तरह रैंडम भरे जाते हैं।

रैंडमनेस कहां से आती है?

साधारण Math.random() जैसे फ़ंक्शन अनुमान लगाने योग्य होते हैं और पासवर्ड जैसी संवेदनशील चीज़ के लिए सुरक्षित नहीं माने जाते। यह टूल ब्राउज़र के मानक window.crypto.getRandomValues() का उपयोग करता है, जो cryptographically secure random नंबर देता है। इसका मतलब है कि हर अक्षर का चुनाव आंकड़ों के लिहाज़ से unpredictable है — कोई पैटर्न या क्रम नहीं, जिससे किसी हमलावर के लिए अगला अक्षर अनुमान लगाना व्यावहारिक रूप से असंभव हो जाता है।

मज़बूती (strength) कैसे तय होती है

पासवर्ड की असली मज़बूती दो चीज़ों पर निर्भर करती है — कुल कितने संभावित अक्षर (character set का आकार) और कितनी लंबाई। मान लीजिए आप चारों प्रकार चुनते हैं, तो इस टूल में कुल 85 संभावित अक्षर बनते हैं (26 छोटे, 26 बड़े, 10 अंक और 23 चिह्न)। हर अक्षर बढ़ने पर संभावित संयोजन 85 गुना बढ़ते हैं। इसलिए 8 अक्षर का पासवर्ड 85^8 संयोजन देता है, जबकि 16 अक्षर 85^16 — यह फ़र्क खरबों गुना से भी कहीं ज़्यादा है। यही वजह है कि लंबाई बढ़ाना, थोड़े-से चिह्न जोड़ने से कहीं ज़्यादा असरदार है। स्क्रीन पर दिखने वाला strength मीटर सिर्फ़ एक मोटा संकेत है, कोई गारंटी नहीं।

एक ठोस उदाहरण

मान लीजिए आप एक 12-अक्षर पासवर्ड बनाते हैं जिसमें सिर्फ़ लोअरकेस अक्षर हैं (26 संभावित अक्षर) — यह 26^12 संयोजन देता है। अब उसी 12 लंबाई पर चारों प्रकार चालू कर दें (85 संभावित अक्षर) — यह 85^12 हो जाता है, यानी लगभग 15 लाख गुना ज़्यादा कठिन। और अगर लंबाई 12 से बढ़ाकर 16 कर दें, तो कठिनाई फिर से करोड़ों गुना बढ़ जाती है। सबक साफ़ है: पहले लंबाई बढ़ाएं, फिर अक्षर-प्रकार की विविधता — दोनों साथ मिलकर सबसे मज़बूत पासवर्ड बनाते हैं।

कब और कैसे इस्तेमाल करें

  • नया अकाउंट बनाते समय: बैंक, ईमेल, या सरकारी पोर्टल जैसे ज़रूरी अकाउंट के लिए 16+ अक्षर वाला मज़बूत पासवर्ड जनरेट करें और सीधे पासवर्ड मैनेजर में सेव करें।
  • पुराने कमज़ोर पासवर्ड बदलते समय: अगर आप एक ही पासवर्ड कई जगह इस्तेमाल कर रहे हैं, तो हर साइट के लिए यहां से अलग-अलग यूनिक पासवर्ड बनाएं।
  • अगर कोई साइट चिह्न (symbols) स्वीकार नहीं करती: सिर्फ़ अपर/लोअर/नंबर चालू रखकर generate करें और लंबाई बढ़ाकर उतनी ही मज़बूती पा लें।
  • Wi-Fi या साझा डिवाइस का पासवर्ड: लंबा रैंडम पासवर्ड बनाएं जिसे बार-बार टाइप नहीं करना पड़ता, इसलिए याद रखने की चिंता नहीं।

आम गलतियां और गलतफ़हमियां

  • नाम, जन्मतिथि, या '123456' जैसे अनुमान-योग्य पैटर्न को 'मज़बूत' मान लेना — ये कुछ ही सेकंड में टूट जाते हैं।
  • एक ही मज़बूत पासवर्ड सभी साइटों पर इस्तेमाल करना — एक साइट leak होने पर बाकी सब खतरे में आ जाते हैं।
  • अक्षर बदलकर बनाया 'P@ssw0rd' जैसा पासवर्ड सुरक्षित समझना — ऐसे आम शब्द-प्रतिस्थापन हमलावरों के लिए जाने-पहचाने हैं।
  • पासवर्ड को WhatsApp, नोट्स ऐप या ईमेल में सादे रूप (plain text) में सहेजना — इसके बजाय भरोसेमंद पासवर्ड मैनेजर इस्तेमाल करें।
  • यह सोचना कि सिर्फ़ चिह्न जोड़ने से छोटा पासवर्ड सुरक्षित हो जाता है — लंबाई का असर विविधता से कहीं ज़्यादा होता है।

सुरक्षा और सीमाएं

इस टूल में जनरेट हुआ पासवर्ड पूरी तरह आपके ब्राउज़र में बनता है — यह किसी सर्वर पर नहीं भेजा जाता और कहीं सहेजा नहीं जाता। पेज रीफ्रेश या बंद करते ही वह मेमोरी से हट जाता है, इसलिए बनाने के तुरंत बाद उसे सुरक्षित जगह सेव करना आपकी ज़िम्मेदारी है। ध्यान रहे, मज़बूत पासवर्ड भी अकेला पूरी सुरक्षा नहीं देता — फ़िशिंग, कमज़ोर रिकवरी ईमेल, या मालवेयर से बचाव के लिए जहां संभव हो two-factor authentication (2FA) ज़रूर चालू रखें।

क्या मेरा डेटा सुरक्षित है?

पासवर्ड ब्राउज़र के cryptographic रैंडम जनरेटर से बनते हैं और सर्वर पर नहीं भेजे जाते।

प्राइवेसी पॉलिसी पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या मेरा पासवर्ड सर्वर पर जाता है या कहीं सेव होता है?

नहीं। पूरा पासवर्ड आपके अपने ब्राउज़र में crypto API से बनता है और किसी सर्वर पर नहीं भेजा जाता। यह कहीं सहेजा भी नहीं जाता — पेज रीफ्रेश या बंद करते ही मेमोरी से हट जाता है। इसलिए बनाने के बाद उसे तुरंत सुरक्षित जगह कॉपी करना ज़रूरी है।

आदर्श रूप से पासवर्ड कितना लंबा होना चाहिए?

सामान्य अकाउंट के लिए कम से कम 12 अक्षर रखें। बैंक, प्राइमरी ईमेल, या सरकारी पोर्टल जैसे ज़रूरी अकाउंट के लिए 16+ अक्षर बेहतर हैं, जिनमें अपर, लोअर, नंबर और चिह्न सभी शामिल हों। लंबाई बढ़ाना सुरक्षा बढ़ाने का सबसे असरदार तरीका है।

क्या वही पासवर्ड दोबारा जनरेट हो सकता है?

व्यवहार में यह लगभग असंभव है। हर बार crypto रैंडम से पूरी तरह नया संयोजन बनता है, और संभावित संयोजनों की संख्या इतनी विशाल है कि दो बार एक ही पासवर्ड मिलने की संभावना नगण्य है। यह चिंता का विषय नहीं है।

अगर कोई वेबसाइट चिह्न (symbols) स्वीकार नहीं करती तो?

ऐसी स्थिति में सिर्फ़ अपरकेस, लोअरकेस और नंबर चालू रखकर पासवर्ड बनाएं। खोई हुई मज़बूती की भरपाई के लिए लंबाई थोड़ी बढ़ा दें — मसलन 16 के बजाय 20 अक्षर। इससे बिना चिह्नों के भी अच्छी सुरक्षा मिल जाती है।

इतने सारे रैंडम पासवर्ड याद कैसे रखूं?

याद रखने की कोशिश न करें — यही मुख्य फ़ायदा है। एक भरोसेमंद पासवर्ड मैनेजर इस्तेमाल करें जो सभी पासवर्ड एन्क्रिप्टेड रूप में सहेज ले। फिर आपको सिर्फ़ एक मज़बूत मास्टर पासवर्ड याद रखना होता है, बाकी सब मैनेजर संभाल लेता है।

क्या मज़बूत पासवर्ड अकेले हैकिंग से पूरी सुरक्षा देता है?

नहीं, वह सिर्फ़ एक परत है। फ़िशिंग लिंक, नकली लॉगिन पेज, कमज़ोर रिकवरी ईमेल, या डिवाइस में मौजूद मालवेयर मज़बूत पासवर्ड को भी बेकार कर सकते हैं। इसलिए जहां संभव हो two-factor authentication (2FA) चालू करें और संदिग्ध लिंक पर लॉगिन करने से बचें।